हिंदू धर्म में कई मान्यताएँ हैं। इन्ही में से एक है देवी-देवताओं की पूजा। देवी-देवताओं की पूजा के लिए लोग मंदिरों में जाते हैं, इसी वजह से हिंदू धर्म में मंदिरों का बहुत ज़्यादा महत्व है। भारत में कई मंदिर हैं, जिनकी लोकप्रियता देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक भी है। जगन्नाथ पूरी के बारे में तो आप जानते ही हैं, लेकिन यहाँ से केवल 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित साक्षी गोपाल का मंदिर बना हुआ है। यह मंदिर उड़ीसा के प्रसिद्ध और धार्मिक शहर पूरी के पास ही है। साक्षी गोपाल का यह मंदिर बहुत प्रसिद्ध है।

साक्षी गोपाल का दर्शन करने के बाद पूरी होती है जगन्नाथ यात्रा:

इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति जगन्नाथ पूरी की यात्रा करने के बाद यहाँ आकर साक्षी गोपाल का दर्शन नहीं करता है, उसकी मनोकामना अधूरी रह जाती है। व्यक्ति की यात्रा तभी पूरी मानी जाती है जब वह जगन्नाथ पूरी का दर्शन करने के बाद साक्षी गोपाल का भी दर्शन करता है। साक्षी गोपाल का दर्शन करने से पहले पास में ही बने चंदन के सरोवर में स्नान किया जाता है। साक्षी गोपाल मंदिर के बनावट की बात करें तो यह बहुत ही सुंदर है। मंदिर की इमारत मनोहारी है।

गोपाल मंदिर में कर दिया अपनी बेटी का रिश्ता:

जिस तरह से साक्षी गोपाल का मंदिर अद्भुत है, इसी तरह से इसकी कथा भी काफ़ी रोचक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक धनवान ब्राह्मण अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर था। वह तीर्थ यात्रा के लिए वृंदावन निकल गया। उसके साथ रास्ते में एक ग़रीब ब्राह्मण का लड़का भी चलने लगा। उस समय यात्राएँ पैदल ही की जाती थी और खाने-पीने की व्यवस्था भी ख़ुद ही करनी पड़ती थी। ग़रीब ब्राह्मण के लड़के ने बुज़ुर्ग अमीर ब्राह्मण की ख़ूब देख-भाल की। उस लड़के की सेवा से प्रसन्न होकर अमीर ब्राह्मण ने वृंदावन के गोपाल मंदिर में अपनी बेटी का रिश्ता उस लड़के के साथ कर दिया।

अमीर ब्राह्मण ने वापस आकर इस काम को पूरा करने का वचन दिया। जब वो दोनो पूरी से यात्रा करके लौट रहे थे तब उस ब्राह्मण लड़के ने बुज़ुर्ग ब्राह्मण को गोपाल जी के सामने किए गए वादे के बारे में याद दिलाया। जब अमीर ब्राह्मण ने यह बात अपने घर पर बताई तो उस ग़रीब ब्राह्मण के लड़के की ख़ूब निंदा की। इस निंदा और वादा खिलाफ़ी से दुखी होकर लड़का पंचायत में गया। पंचों ने लड़के से इस बात का सबूत माँगा। पंचों ने भी लड़के का ख़ूब मज़ाक़ उड़ाया। अपनी बात को सच साबित करने के लिए लड़का फिर वृंदावन पहुँच गया। लड़का गोपाल जी से हाथ जोड़कर अपने दुःख के बारे में बताया और कहा कि साथ चलकर पंचायत को सच्चाई बताएँ।

लड़के के पीछे देखते ही स्थिर हो गए गोपाल जी:

लड़के के विश्वास को देखकर गोपाल जी काफ़ी प्रसन्न हुए और लड़के का साक्षी यानी गवाह बनने के लिए तैयार हो गए। गोपाल जी ने लड़के को कहा कि तुम आगे-आगे चलो में तुम्हारे पीछे चलूँगा और मेरे घुंगरुओं की आवाज़ आती रहेगी। तुम पीछे मुड़कर मत देखना वरना में वहीं स्थिर हो जाऊँगा। लड़का बात मानकर चलने लगा। चलते-चलते जब जब वो अट्टक के नज़दीकी गाँव पुलअलसा पहुँचा तो रेतीला रास्ता शुरू हो गया। रेतिले रास्ते पर घुंगरुओं की आवाज़ आना बंद हो गयी। लड़के ने पीछे मुड़कर देखा और गोपाल जी वहीं स्थिर हो गए।

भरोसा रखने वाले को कभी निराश नहीं करते भगवान:

jagannath

भगवान को स्थिर हुआ देखकर ग़रीब ब्राह्मण का लड़का बहुत परेशान हो गया। लड़के की परेशानी देखकर भगवान ने कहा कि तुम परेशान मत हो और पंचायत को यहीं लेकर आओ। लड़का गया और पंचायत को लेकर वहीं पहुँचा जहाँ गोपाल जी खड़े थे। पंचायत के पहुँचते ही गोपाल जी ने सारी बातें उन्हें बताई जो अमीर ब्राह्मण ने उस लड़के से कही थी। इस गवाही के बाद ग़रीब लड़के का विवाह उस अमीर ब्राह्मण की लड़की से सम्पन्न हुआ और गोपाल जी वहीं समा गए। उन्ही की याद में उस जगह पर साक्षी गोपाल जी का मंदिर बनवाया गया। मंदिर इस बात का गवाह है कि जो भक्त भगवान पर भरोसा रखते हैं, भगवान उन्हें कभी निराश नहीं करते हैं।

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