भारत में ऐसे-ऐसे महान लोग हुए हैं जिनकी कुर्बानी और काम लोग सदियों तक याद रखेंगे. उऩ्हीं में से एक सरदार पटेल आजाद भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री थे. आज के दिन ही इनकी 182 मीटर ऊंची प्रतिमा ‘स्टैचू ऑफ यूनिटी’ लगाई गई है और इसे दुनिया का सबसे ऊंचा स्टैचू बताया जा रहा है. इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरदार पटेल कौटिल्य की कूटनीति और शिवाजी के शौर्य के समावेश थे. सरदार वल्लभ भाई पटेल ने अपने देश से सच्चा प्यार किया और उन्हें लौह पुरुष ऐसे ही नहीं कहा गया है क्योंकि वो जो भी निश्चय करते थे उसे पूरा जरूर करते थे. देश के सबसे सम्मानित, परिपक्त और दूरदर्शी नेताओं में सरदार वल्लभ पटेल को शामिल किया जाता है. इनके विचारों पर चलने वाले व्यक्ति अवश्य ही सफल होते हैं. सरदार वल्लभ भाई पटेल के 10 अहम विचार, जिन्हें आपको जरूर पढ़ने चाहिए.

सरदार वल्लभ भाई पटेल के 10 अहम विचार

इंसान अपने जीवन मे बहुत सी बातों को जगह देते हैं और किसी ना किसी को अपना गुरु बनाकर उनके कदमों के अनुसार ही चलते हैं. मगर आपको सरदार वल्लभ पटेल के इन अहम विचारों को जरूर पढ़ना चाहिए.

1. “इस मिट्टी में कुछ अनूठा है, जो कई बाधाओं के बावजूद हमेशा महान आत्माओं का निवास रहा है.”

2. “आज हमें ऊंच-नीच, अमीर-गरीब, जाति-पंथ के भेदभावों को समाप्त कर देना चाहिए.”

3. “शक्ति के अभाव में विश्वास व्यर्थ है. विश्वास और शक्ति, दोनों किसी महान काम को करने के लिए आवश्यक हैं.”

4. “मनुष्य को ठंडा रहना चाहिए, क्रोध नहीं करना चाहिए. लोहा भले ही गर्म हो जाए, हथौड़े को तो ठंडा ही रहना चाहिए अन्यथा वह स्वयं अपना हत्था जला डालेगा. कोई भी राज्य प्रजा पर कितना ही गर्म क्यों न हो जाये, अंत में तो उसे ठंडा होना ही पड़ेगा.

5. “आपकी अच्छाई आपके मार्ग में बाधक है, इसलिए अपनी आँखों को क्रोध से लाल होने दीजिये, और अन्याय का सामना मजबूत हाथों से कीजिये.”

6. “अधिकार मनुष्य को तब तक अंधा बनाये रखेंगे, जब तक मनुष्य उस अधिकार को प्राप्त करने हेतु मूल्य न चुका दे.”

7. ”आपको अपना अपमान सहने की कला आनी चाहिए.”

8. ”मेरी एक ही इच्छा है कि भारत एक अच्छा उत्पादक हो और इस देश में कोई अन्न के लिए आंसू बहाता हुआ भूखा ना रहे.”

9. ”जब जनता एक हो जाती है, तब उसके सामने क्रूर से क्रूर शासन भी नहीं टिक सकता। अतः जात-पांत के ऊँच-नीच के भेदभाव को भुलाकर सब एक हो जाइए.”

10. ”संस्कृति समझ-बूझकर शांति पर रची गयी है. मरना होगा तो वे अपने पापों से मरेंगे। जो काम प्रेम, शांति से होता है, वह वैर-भाव से नहीं होता.”

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