हिन्दू धरम में महाभारत और रामायण का ख़ास स्थान है. इस दुनिया में शायद ही ऐसा कोई हिन्दू होगा, जो रामायण के बारे में ना जानता हो. दरअसल, रामायण भगवान राम की जिंदगी से जुड़ी है इस्ल के चलते इसको रामायण का नाम दिया गया है. कहते हैं जब भगवान राम को उनकी माता ने 14 वर्षों के बनवास का आदेश दे दिया था तो वह सीता माँ और अपने छोटे भाई लक्ष्मण के साथ जंगलों में रहने लगे थे. इसी बीच भगवान शिव के भक्त रावण की गंदी नजर सीता माँ पर पड़ गई. रावण ने एक ऐसी चाल चली जिसकी लपेट में सीता माँ आ गई और वह उन्हें अपने साथ लंका ले गया.

जब राम को सीता माँ के अपहरण की भनक लगी तो वह व्याकुल हो गए और उनकी तलाश में जुट गए. इसी बीच उनके भक्त हनुमान ने उनकी सहायता की और सीता माँ को रावण के चंगुल से छुडवाने के लिए अपनी पूँछ में आग लगा दी. तभी से इस संपूर्ण घटना को रामायण का नाम दिया गया है. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इस दुनिया में अधिकतर लोग रामायण को सच मानते हैं परन्तु वहीँ कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें रामयण काल्पनिक लगती है. लेकिन, आज के इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे सबूतों से रूबरू करवाने जा रहे हैं, जिन्हें जान कर आप रामायण पर विश्वास करने लगेंगे. दरअसल, इन सबूतों से ये बात साफ़ ज़ाहिर होती है कि रामायण एक वास्तविक घटना है.

अशोक वाटिका

अगर इतिहास के पन्ने पर ओले जाएं तो उसमें आपको पता चलेगा कि अशोक वाटिका रावण का सबसे पसंदीदा एवं गुप्त स्थान था. केवल इतना ही नहीं बल्कि माता सीता के अपहरण के बाद रावण ने उन्हें यही पर बंदी बनाकर रखा था. गौरतलब है कि यह स्थान इतना रहस्यमई था कि हनुमानजी भी उस स्थान को आसानी से ढूंढ नहीं पाए थे. लेकिन लगातार कोशिश के चलते हनुमान जी को विभीषण की मदद से स्थान के बारे में सूचना मिली. आज भी यह स्थान श्रीलंका में स्थित है जिससे यह बात साफ जाहिर होती है कि रामायण सच में घटी थी.

हनुमान जी के पैरों के निशान

जब भगवान राम को सीता मां के अपहरण के बारे में भनक लगी तो उन्होंने हनुमान जी को उनकी खोज के लिए भेज दिया. कहां जाता है कि हनुमान जी विकराल रूप धारण करके एक अथाह समुद्र को पार करके रावण की लंका में गए थे. आज भी उस स्थान को देखा जाए तो वहां हनुमानजी के पदचिन्ह मौजूद हैं.

गर्म जल के कुएं

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार लंकापति रावण ने अपनी शक्तियों की सहायता से गर्म जल के अणुओं का निर्माण करवाया था. आज रामायण को घटे हुए हजारों साल बीत चुके हैं परंतु यह में आज भी लंका में मौजूद है और आज भी इनसे गर्म जल निकलता है.

रामसेतु

अधिकतर लोग रामसेतु को कुदरत का करिश्मा मानते हैं. ऐसा माना जाता है कि यह राम जी द्वारा बनाया गया था जिसके कारण उसका नाम रामसेतु पड़ा. दरअसल यह एक फूल है जो कि भगवान राम ने वानर और भारत की सेना की मदद से बनाया था.

तैरते पत्थर

अगर आप किसी नदी या समुद्र में पत्थर फेंके तो वह आप को डूबते नजर आएंगे. परंतु भगवान राम की सेना ने पत्थरों पर उनका नाम लिखकर फेंका तो वह पत्थर पानी में तैरने लगे. इन्हीं में से कुछ पत्थर आज भी रामेश्वरम, दक्षिण भारत में मौजूद हैं

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