हिन्दू धर्म में भगवान शिव की महिमा के बारे में बताने की जरुरत नहीं है। भगवान शिव को भोलेनाथ के नाम से इसलिए जाना जाता है कि ये बहुत ही भोले हैं और अपने सभी भक्तों का कल्याण करते हैं। ये अपने किसी भक्त में कोई अंतर नहीं करते हैं। भगवान शिव की भक्ति वैसे तो पुरे साल की जाती है, लेकिन सावन में भगवान शिव की भक्ति का विशेष फल मिलता है। शास्त्रों के अनुसार सावन भगवान शिव का सबसे पसंदीदा महिना होता है। इस महीने में एक लोटे जल और बेलपत्र से भी भगवान शिव बहुत ज्यादा प्रसन्न हो जाते हैं।

इस बार 28 जुलाई से शुरू हो रहा है सावन:

इस बार सावन 28 जुलाई से शुरू हो रहा है। इस सावन भगवान शिव आपके और आपके घर के ऊपर मेहरबान रहें, इसके लिए कुछ उपाय किये जा सकते हैं। अगर आपके घर के आस-पास कोई खाली जगह हो तो वहां इस सावन बेलपत्र का पौधा लगाया जा सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बेलपत्र का पौधा केवल भगवान शिव को ही पसंद नहीं है, बल्कि इसके कई औषधीय फायदे भी हैं। इससे कई बिमारियों को हमेशा के लिए दूर भी किया जा सकता है।

बेलपत्र के पेड़ के फायदों के बारे में जानकर आप हैरानी में पड़ जायेंगे। इसमें डायबिटीज, बीपी जैसी गंभीर शारीरिक समस्याओं को भी दूर करने की क्षमता होती है। वास्तुशास्त्र के हिसाब से भी घर के बाहर बेलपत्र का पौधा लगाना काफी शुभ माना जाता है। शास्त्रों में इसके महत्व के बारे में बताया गया है। शिवपुराण में इसे महत्वपूर्ण पेड़ की संज्ञा दी गयी है। बेलपत्र केवल भगवान शिव को ही नहीं बल्कि सभी देवी-देवताओं को पसंद है। बेलपत्र का पौधा जिस भी घर के आस-पास होता है, वहां देवी-देवताओं की कृपा हमेशा बनी रहती है।

शिवपुराण के अनुसार बेलपत्र की कुछ खास बातें:

*- जिस घर में बेलपत्र का वृक्ष लगाया जाता है और रोज उसकी देखभाल की जाती है यानी उसे पानी दिया जाता है, वहां के लोगों के कई पापों का स्वतः ही नाश हो जाता है। इसके साथ ही उस जगह और उसके आस-पास सकारात्मक उर्जा का निवास रहता है।

*- बेलपत्र का पेड़ लगाते समय इस बात का ध्यान रखें कि इसे घर की उत्तर-पक्षिम दिशा में ही लगायें, वास्तु के हिसाब से यह शुभ होता है। इससे घर के लोगों के मान-सम्मान में वृद्धि होती है।

*- अगर घर की उत्तर-पक्षिम दिशा में जगह ना हो तो इसे घर की उत्तर-दक्षिण दिशा में भी लगाया जा सकता है।

*- बहुत कम लोग ही यह बात जानते हैं कि शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ बेलपत्र कभी बासी नहीं होता है। यानी अगले दिन उसे धोकर पुनः चढ़ाया जा सकता है।

*- बेलपत्र तोड़ते समय इस बात का खास ध्यान रखें कि रविवार, अष्टमी, चतुर्दशी और अमावस्या को बेलपत्र भूलकर भी नहीं तोड़ना चाहिए।

*- शिवपुराण में बेलपत्र को भगवान शिव का ही रूप कहा गया है। इसे श्रीवृक्ष भी कहा गया है।

*- श्रीदेवी धन की देवी माता लक्ष्मी का ही एक नाम है, इसलिए बेलपत्र की पूजा से माता लक्ष्मी बहुत प्रसन्न होती हैं।

स्कन्दपुराण के अनुसार एक बार माता पार्वती को बहुत पसीना आ रहा था। उन्होंने अपनी ललाट से पसीना पोछकर फेंका, जिसकी कुछ बूंदे मंदार पर्वत पर गिर गयी। माता के पसीने से वहां बेलपत्र उग गया।

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