जैसा कि आप सभी लोग जानते हैं कि दीपावली से पहले धनतेरस का पर्व मनाया जाता है धनतेरस के दिन सभी लोग नई नई चीजें और सामान की खरीदारी करते हैं बहुत से लोग सोने और चांदी की भी खरीदारी में लगे रहते हैं ऐसा कहा जाता है कि धनतेरस के दिन नई चीजें और सोना चांदी खरीदना बहुत ही शुभ माना जाता है इस वर्ष धनतेरस का पर्व 5 नवंबर को मनाया जाएगा, हर वर्ष दिवाली से पहले धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है परंतु आप लोगों ने कभी इस बात पर गौर किया है कि आखिर दिवाली से पहले धनतेरस का त्यौहार क्यों मनाया जाता है? आखिर इसके पीछे वजह क्या है? आखिर दीपावली से पहले धनतेरस की पूजा क्यों होती है? अगर आपके मन में भी इस तरह का कोई सवाल है या फिर आपने इस विषय में कभी गौर नहीं किया तो आज हम आपको इस लेख के माध्यम से बताने वाले हैं कि आखिर दिवाली से पहले धनतेरस की पूजा क्यों की जाती है?

दरअसल, धनतेरस की पूजा कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को की जाती है शास्त्रों के मुताबिक इस दिन धनवंतरी का जन्म हुआ था इसलिए इसे धनतेरस के नाम से जाना जाता है धनवंतरी के जन्म के अलावा इस दिन धन की देवी माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की भी पूजा अर्चना की जाती है शास्त्रों में इस बात का उल्लेख किया गया है कि धनतेरस के दिन ही भगवान धनवंतरी अपने हाथों में स्वर्ण कलश लेकर समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे धनवंतरी ने कलश में भरा अमृत देवताओं को पिलाकर अमर बना दिया था धनवंतरी के जन्म के 2 दिनों पश्चात ही धन की देवी माता लक्ष्मी जी प्रकट हुई थी इसलिए दिवाली के 2 दिन पहले धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है और धनतेरस के 2 दिन के बाद दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है।

अगर हम शास्त्रों के अनुसार देखे तो भगवान धनवंतरी देवताओं के वैद्य भी माने गए हैं इनकी भक्ति और पूजा से आरोग्य सुख यानी स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है ऐसा माना जाता है कि भगवान धनवंतरी विष्णु के अंशावतार हैं संसार में चिकित्सा विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए भगवान विष्णु जी ने भगवान धनवंतरी का अवतार धारण किया था धनतेरस से जुड़ी हुई एक कथा के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन देवताओं के शुभ कार्य में बाधा डालने पर भगवान विष्णु जी ने असुरों के गुरु शुक्राचार्य की एक आंख फोड़ दी थी इस कथा के अनुसार देवताओं को राजा बलि के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु जी ने वामन अवतार धारण किया था वामन भगवान द्वारा मांगी गई तीन पग भूमि दान करने के लिए कमंडल से जल लेकर संकल्प लेने लगे थे।

जब हाथ में जल लेकर संकल्प लेने लगे तब राजा बलि को दान करने से रोकने के लिए शुक्राचार्य राजा बलि के कमंडल में छोटा रूप धारण करके प्रवेश कर गए थे तब भगवान वामन ने अपने हाथों में रखे हुए कुशा को कमंडल में ऐसे रखा कि शुक्राचार्य की एक आंख फूट गई थी इसके बाद राजा बलि ने संकल्प लेकर तीन पग भूमि दान में दे दी थी इस तरह बलि के भय से देवताओं को भगवान विष्णु जी के अवतार वामन अवतार ने मुक्ति दिलाई थी राजा बलि ने जो धन-संपत्ति देवताओं से छीन ली थी उससे कई गुना धन-संपत्ति देवताओं को फिर से वापस प्राप्त हो गई थी इसी वजह से धनतेरस का त्यौहार बड़ी ही धूमधाम के साथ लोगों द्वारा मनाया जाता है।

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