भारत एक धार्मिक देश है, इस वजह से यहाँ मंदिरों और मस्जिदों की संख्या बहुत ज़्यादा है। भारत में लाखों मंदिर होंगे। लेकिन इनमें से कुछ ही मंदिर ऐसे हैं जो काफ़ी प्रसिद्ध हैं। इनमें से कई मंदिर तो ऐसे भी हैं जो विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। इन मंदिरों में से कई मंदिर ऐसे भी हैं जो बहुत ही प्राचीन हैं। आजतक इन मंदिरों के बनाए जानें के काल के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पायी हैं। वहीं भारत में कुछ ऐसे भी मंदिर हैं जो रहस्यों से भरे हुए हैं।

जी हाँ भारत में कई ऐसे मंदिर भी हैं जो काफ़ी रहस्यमयी हैं। आजतक इन मंदिरों के रहस्यों के बारे में वैज्ञानिक भी नहीं पता लगा पाए हैं। इन मंदिरों में कुछ ऐसी घटनाएँ घटती रहती हैं, जो लोगों को हैरानी में डाल देती हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही रहस्यमयी मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके रहस्य के बारे में जानकर आपके पैरों तले की ज़मीन खिसक जाएगी। अगर आपको मेरी बातों पर यक़ीन नहीं हो रहा है तो ख़ुद ही देख लीजिए।

रात में कोई इंसान नहीं करता रुकने की हिम्मत:

इस मंदिर के बारे में सुनकर लोगों की हालत ख़राब हो जाती है। वैसे तो यह मंदिर अपनी ख़ूबसूरती के लिए काफ़ी प्रसिद्ध है। लेकिन इसका रहस्य लोगों को हैरानी में डाल देता है। इस मंदिर का एक ऐसा रहस्य है जो आपके रोम-रोम में रोमांच और ख़ौफ़ भर देगा। जी हाँ हम जिस मंदिर की बात कर रहे हैं, वह राजस्थान के बाड़मेर के किराडु शहर में स्थित है। इस मंदिर और किराडु शहर के बारे में कहा जाता है कि प्राचीनकाल में किसी साधु ने श्राप दिया था। उसके बाद से ही इस मंदिर में कोई भी इंसान रात के समय रुकने की हिम्मत नहीं करता है।

रात में मंदिर में प्रवेश करते ही मनुष्य बन जाते हैं पत्थर के बुत:

जो इंसान इस मंदिर में रात के समय ग़लती से रुक जाता है, वह पत्थर का बुत बन जाता है। आज भी इस मंदिर के रहस्यों से पर्दा नहीं उठ पाया है। यहाँ के मंदिर के खंडहर में रात में जो भी इंसान प्रवेश करता है, वह पत्थर का बन जाता है। राजस्थान का किराडु शहर मंदिरों की शिल्प कला के लिए विश्व विख्यात है। किराडु को राजस्थान का खजुराहो भी कहा जाता है। जानकारी के अनुसार यहाँ के मंदिरों का निर्माण लगभग 11 शताब्दी में किया गया था। किसी ज़माने में यह शहर काफ़ी सम्पन्न था। लेकिन 12 शताब्दी के बाद परमार वंश के शासनकाल में धीरे-धीरे यह शहर वीरान होता चला गया।

इस शहर के बारे में कहा जाता है कि यहाँ एक साधु ने श्राप दिया था। आज से लगभग 900 साल पहले परमार वंश के शासनकाल में इस शहर में एक ज्ञानी साधु रहा करते थे। एक बार साधु भ्रमण के लिए निकले और अपने शिष्यों को स्थानीय लोगों के सहारे छोड़ दिया और कहा कि इनके भोजन-पानी की व्यवस्था कर देना। लेकिन स्थानीय लोगों ने ना ही मंदिर का ख़याल रखा और ना ही शिष्यों का। जब साधु वापस आए तो मंदिर और शिष्यों की बुरी हालत देखकर क्रोधित हुए और श्राप दिया कि जहाँ के लोगों में सेवा और दया की भावना नहीं है, वहाँ जीवन का कोई मतलब नहीं है। इसलिए यहाँ के सभी लोग पत्थर के हो जाएँ और पूरा शहर पत्थर में बदल गया। आज भी सूर्यास्त के बाद इस जगह कोई घुसने की हिम्मत नहीं करता है।

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