खून से तू सींच ले
मुट्ठियों को भींच ले
सच थोड़ा बांच ले
सूरज की आंच ले

राख में तू आग बन
फन फैला नाग बन
बाजुओं में कस ले
काटे तो डस ले

तलवार बन तू ढाल बन
रक्षक बन महाकाल बन
आंखों से आंक ले
तेजाब तू फांक ले

यूँ न तू डरा कर
हर पल न मरा कर
धर्म को विद्युत दे
अधर्म पे तू मूत दे

रणभूमि में तैयार हो
सत्य की न हार हो
विजय की ही गीत हो
अधर्म की न जीत हो

कटे न सर निर्दोष का
ध्यान रहे जोश का
म्यान में जुनून हो
शैतानों का ही खून हो

आस्तीन चढ़ा हुंकार कर
बुराई पर प्रहार कर
सर उठा झुक न कभी
कदम बढ़ा रुक न कभी

अस्त्र है तू
शस्त्र है तू
एक नही
सहस्त्र है तू

मजलूमों की पुकार है तू
पापियों का संहार है तू
युद्ध की ललकार है तू
काल्कि अवतार है तू

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