हर व्यक्ति की चाहत होती है कि वह सुकून से अपने घर में रहे। उसके घर में किसी तरह की कोई परेशानी ना हो। लेकिन ऐसा सबके साथ नहीं होता है। कई लोगों का जीवन परेशानियों के बीच ही गुज़र जाता है। कई लोग सुख-समृद्धि की चाहत करते-करते अपने अंतिम समय तक पहुँच जाते हैं, लेकिन उन्हें कोई लाभ नहीं होता है। सुख-समृद्धि पाने के लिए कई लोग देवी-देवताओं की शरण में जाते हैं। उनमें से कुछ लोगों को फ़ायदा होता है और कुछ को नहीं।

देवताओं में प्रथम पूज्य हैं :

इसकी सबसे बड़ी वजह है देवी-देवताओं का सही विधि-विधान से पूजन ना करना। जो लोग पूरे विधि-विधान से देवी-देवताओं की पूजा करते हैं, उनके जीवन में सुख का संचार होता है। वहीं नियमों को अनदेखा करने वालों के जीवन में दुखों का पहाड़ टूट जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार सभी देवी-देवताओं की पूजा से पहले श्री गणेश की पूजा करने का विधान है। श्री गणेश को प्रथम पूज्य देवता कहा जाता है। जो लोग इनकी पूजा करते हैं, उनके जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

सदियों से चली आ रही है दुर्वा चढ़ाने की परम्परा:

श्री गणेश की पूजा भी कुछ लोग सही तरीक़े से नहीं करते हैं। श्री गणेश की पूजा करते समय दुर्वा अर्पित करने का प्रावधान है। इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। यह परम्परा सदियों से चली आ रही है। समय भी कुछ चीज़ों का ध्यान रखना बहुत ही आवश्यक होता है। श्री गणेश को दुर्वा चढ़ाते समय गणेश जी के ख़ास 11 मंत्रों का जाप करना चाहिए। जैसा कि आप सभी लोग जानते हैं दुर्वा एक तरह की घास है। यह हर जगह आसानी से मिल जाती है। उज्जैन के महान पंडित मनीष शर्मा के अनुसार श्री गणेश को दुर्वा चढ़ाने के सम्बंध में एक कथा प्रचलित है।

प्राचीनकाल में अनलासुर नाम का एक राक्षस रहता था। इस राक्षस के आतंक से सभी देवता भी भयभीत थे। देवताओं को आतंकित देखकर श्री गणेश ने अनलासुर को निगल लिया था। इस वजह से श्री गणेश के पेट में काफ़ी जलन होने लगी थी। इसके बाद ऋषि-मुनियों ने गणेश जी को खाने के लिए दुर्वा दी। दुर्वा खाते ही गणेश जी के पेट की जलन शांत हो गयी। इसके बाद से ही श्री गणेश को दुर्वा चढ़ाने की परम्परा शुरू हो गई।

गणेश जी को दुर्वा चढ़ाने का नियम:

*- श्री गणेश को दुर्वा ख़ास तरह से चढ़ाई जाती है। दुर्वा का जोड़ा बनाकर ही गणेश जी को अर्पित करना चाहिए। 22 दुर्वा को एक साथ जोड़ने पर इसके 11 जोड़े तैयार होते हैं। यही श्री गणेश को चढ़ाना चाहिए।

*- श्री गणेश को दुर्वा अर्पित करने के लिए किसी । जहाँ गंदगी हो, वहाँ से भूलकर भी दुर्वा नहीं लेना चाहिए।

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*- दुर्वा चढ़ाने से पहले इसे अच्छी तरह साफ़ पानी से धो लेना चाहिए।

*- श्री गणेश को दुर्वा अर्पित करते समय इन 11 मंत्रों का जाप अवश्य करना चाहिए-

ऊँ गं गणपतेय नम:

ऊँ गणाधिपाय नमः

ऊँ उमापुत्राय नमः

ऊँ विघ्ननाशनाय नमः

ऊँ विनायकाय नमः

ऊँ ईशपुत्राय नमः

ऊँ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः

ऊँएकदन्ताय नमः

ऊँ इभवक्त्राय नमः

ऊँ मूषकवाहनाय नमः

ऊँ कुमारगुरवे नमः

इन्ही मंत्रों का जाप करते हुए श्री गणेश को दुर्वा के 11 जोड़े अर्पित करने चाहिए।

*- अगर किसी वजह से आप इन मंत्रों को बोलने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं तो यह कहते हुए दुर्वा अर्पित करें-

श्री गणेशाय नमः दूर्वांकुरान् समर्पयामि।

*- इसके अलावा अगर आप किसी मंत्र का भी जाप नहीं कर पा रहे हैं तो पूरी श्रद्धा के साथ श्री गणेश के नाम का जाप करते हुए दुर्वा की 3, 5 या 11 गाँठ भी चढ़ा सकते हैं।

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