हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार किसी भी व्यक्ति के जीवन में छोटी-छोटी बातों का असर बहुत ज़्यादा होता है। सबसे ज़्यादा जीवन पर मनुष्य के कर्मों का प्रभाव पड़ता है। अगर मनुष्य अच्छे कर्म करता है तो इसका फल ना केवल उसे मिलता है बल्कि उसके परिवार वालों को भी मिलता है। वहीं जो लोग बुरे कर्म करते हैं, इससे वो तो परेशान होते ही हैं, साथ में परिवार को भी कष्ट भुगतने पड़ते हैं। इसीलिए कहा जाता है कि हर इंसान को इन बातों का ध्यान रखते हुए जीवन में ज़्यादा से ज़्यादा अच्छे कर्म करने चाहिए और बुरे कर्मों से दूर रहना चाहिए।

इस बार 13 जुलाई यानी शुक्रवार को आषाढ़ महीने की अमावस्या पड़ रही है। अमावस्या का हिंदू धर्म में बड़ा ही महत्वपूर्ण स्थान होता है। ज्योतिषाचार्य परवीन द्विवेदी के अनुसार अमावस्या पितरों का दिन होता है। इस दिन पितरों का ही राज रहता है। इसी वजह से इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण करने का विधान है। जो लोग पितृदोष से पीड़ित हैं उन्हें इस दिन कुछ ख़ास उपाय करने चाहिए। इससे पितरों का आशीर्वाद मिलता है और रुके हुए काम भी बनने लगते हैं।

अमावस्या के दिन करें ये उपाय:

*- अमावस्या के दिन पितृगणों को प्रसन्न करके उनका आशीर्वाद पाने के लिए किसी पवित्र नदी के पास जाएँ और उसमें काला तिल डालकर तर्पण करें।

*- पीपल के वृक्ष में देवताओं के साथ ही पितरों का भी वास माना गया है। इसलिए अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ को जल चढ़ाएँ और उसने नीचे घी का एक दीपक जलाएँ।

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*- अमावस्या के दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए किसी ब्राह्मण को घर बुलाकर भोजन करवाना चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं कर पा रहे हैं तो उन्हें भोजन की सामग्री जैसे आटा, फल। गुड़, आदि दान करें।

*- अमावस्या के दिन अपने पितरों का ध्यान करते हुए गाय को हरा चारा खिलाना भी शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि गाय को चारा खिलाने से पितृ प्रसन्न होते हैं।

*- अमावस्या के दिन गाय के गोबर से बनी हुई अंगिठी जलाकर उसपर घी गुड़ का धूप दें और पितृ देवताभ्यो अर्पणमस्तु मंत्र का जाप करें।

*- अमावस्या के दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए कच्चे दूध में जौ, तिल और चावल मिलाकर नदी में प्रवाहित करना चाहिए। यह काम सूर्योदय के समय करना अच्छा होता है।

पितृदोष के कारण होता है यह सब:

*- जिस घर में पितृदोष होता है, अक्सर उस घर में हर समय कोई ना कोई बीमार रहता है।

*- जिस घर में पितृदोष होता है, उस घर के बच्चों में हमेशा झगड़ा होता रहता है।

*- पितृदोष की वजह से दम्पति को संतान प्राप्ति में काफ़ी देरी होती है।

*- पितृदोष की वजह से किसी भी काम में सफलता नहीं मिलती है और धन का व्यय भी बढ़ जाता है।

*- पितृदोष की वजह से ही व्यक्ति के पैसे ज़्यादा ख़र्च होने लगते हैं और वह धीरे-धीरे ग़रीब होने लगता है।

क्या कहते हैं ज्योतिषी:

ज्योतिषियों का कहना है कि अगर किसी घर में किसी व्यक्ति की अकाल मृत्यु हो जाती है और उस मृत व्यक्ति का सही तरह से पूरे विधि-विधान से श्राद्ध नहीं किया जाता है तो उस परिवार में जन्म लेने वाली संतान की कुंडली में पितृदोष होता है। पितृदोष का सबसे ज़्यादा असर परिवार के पुत्र संतान पर पड़ता है।

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